परामर्श में सहयोग देने वाले विभाग/संस्थाएँ — UPTET 2026 Paper-I Topper Notes
UPTET 2026 Paper-I के लिए परामर्श में सहयोग देने वाले विभाग — मनोविज्ञानशाला प्रयागराज, DIET, जिला चिकित्सालय, और SMC के टॉपर-लेवल नोट्स।
परामर्श में सहयोग देने वाले विभाग/संस्थाएँ (Departments/Institutions Supporting Counselling)
UPTET 2026 Paper-I — Child Development & Pedagogy (बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र)
🎯 WHY THIS TOPIC MATTERS IN UPTET PAPER-I
परामर्श (Counselling) बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण उप-विषय है जो UPTET Paper-I में लगातार पूछा जाता रहा है। यह विषय इसलिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि UPTET उत्तर प्रदेश राज्य का परीक्षा है, इसलिए UP की राज्य स्तरीय संस्थाओं जैसे मनोविज्ञानशाला प्रयागराज, मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र, DIET, जिला चिकित्सालय आदि से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। परीक्षक यह जानना चाहता है कि अभ्यर्थी को विद्यालय स्तर पर बालकों के मनोवैज्ञानिक समर्थन तंत्र (psychological support system) की कितनी व्यावहारिक समझ है। इस टॉपिक से प्रायः 1-2 प्रश्न सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से आते हैं, और कई बार इन्हें "विशिष्ट बालक," "समावेशी शिक्षा," "मार्गदर्शन एवं परामर्श" जैसे व्यापक विषयों के अंतर्गत पूछा जाता है। प्रश्नों का स्वरूप सामान्यतः तथ्यात्मक (factual) होता है — जैसे "मनोविज्ञानशाला कहाँ स्थित है?", "परामर्श में कौन-सी संस्था सहयोग करती है?", "DIET का परामर्श में क्या योगदान है?" आदि। कभी-कभी अनुप्रयोग-आधारित (application-based) प्रश्न भी पूछे जाते हैं जहाँ एक केस दिया जाता है और पूछा जाता है कि शिक्षक किस संस्था से सहायता ले सकता है।
📝 TOPPER NOTES / SHORT HIGH-VALUE THEORY
🔷 परामर्श (Counselling) — संक्षिप्त परिचय
परामर्श एक ऐसी व्यावसायिक प्रक्रिया है जिसमें एक प्रशिक्षित विशेषज्ञ (परामर्शदाता/Counsellor) बालक या व्यक्ति की समस्याओं — चाहे वे शैक्षिक हों, भावनात्मक हों, सामाजिक हों या व्यावसायिक — को समझकर उसे स्वयं समाधान खोजने में सहायता करता है। परामर्श का मूल उद्देश्य बालक के समग्र व्यक्तित्व विकास, समायोजन (adjustment), आत्मविश्वास निर्माण और समस्या-समाधान क्षमता का विकास करना है। यह मार्गदर्शन (Guidance) से भिन्न है क्योंकि मार्गदर्शन सामान्य दिशा-निर्देश देना है जबकि परामर्श अधिक गहन, व्यक्तिगत और विशेषज्ञतापूर्ण प्रक्रिया है। UPTET की दृष्टि से यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि परामर्श कोई एक व्यक्ति या एक विद्यालय का काम नहीं है, बल्कि इसमें अनेक विभागों, संस्थाओं और समुदाय का सहयोग आवश्यक होता है।
🔷 परामर्श में सहयोग देने वाले प्रमुख विभाग/संस्थाएँ — विस्तृत विवेचन
1️⃣ मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज (State Psychological Bureau/Laboratory, Prayagraj)
मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज उत्तर प्रदेश की सर्वोच्च एवं सबसे प्रमुख मनोवैज्ञानिक संस्था है जो राज्य स्तर पर परामर्श, मार्गदर्शन एवं मनोवैज्ञानिक सेवाओं का संचालन करती है। यह संस्था UP शासन के शिक्षा विभाग (बेसिक/माध्यमिक) के अंतर्गत कार्य करती है और इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य राज्य के विद्यालयों में मनोवैज्ञानिक सेवाओं को पहुँचाना है। इसके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं — मनोवैज्ञानिक परीक्षणों (Psychological Tests) का निर्माण, मानकीकरण एवं प्रकाशन, जिसमें बुद्धि परीक्षण (Intelligence Tests), व्यक्तित्व परीक्षण (Personality Tests), अभिरुचि परीक्षण (Aptitude Tests), रुचि परीक्षण (Interest Inventories) आदि शामिल हैं। यह संस्था शैक्षिक एवं व्यावसायिक मार्गदर्शन (Educational & Vocational Guidance) कार्यक्रमों का आयोजन करती है और शिक्षकों को परामर्श प्रशिक्षण (Counselling Training) प्रदान करती है ताकि वे विद्यालय स्तर पर बालकों की मनोवैज्ञानिक समस्याओं को पहचान सकें और प्राथमिक स्तर पर सहायता कर सकें। मनोविज्ञानशाला समस्याग्रस्त बालकों (Problem Children) की पहचान एवं निदान में भी सहयोग करती है — जैसे अधिगम अक्षमता (Learning Disability), बौद्धिक मंदता (Intellectual Disability), व्यवहार समस्याएँ (Behavioural Problems) आदि। इसके अलावा यह संस्था अनुसंधान (Research) कार्य भी करती है जिसमें बालकों की मनोवैज्ञानिक समस्याओं, शैक्षिक उपलब्धि और समायोजन से संबंधित शोध शामिल हैं। UPTET परीक्षा में यह सबसे अधिक बार पूछी जाने वाली संस्था है, और प्रश्न प्रायः "उत्तर प्रदेश में मनोवैज्ञानिक सेवाओं का केन्द्र कहाँ है?" या "मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का निर्माण कौन-सी संस्था करती है?" के रूप में आता है।
2️⃣ मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र (Divisional Psychology Centre)
मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज की शाखा इकाइयाँ (branch units) हैं जो उत्तर प्रदेश के विभिन्न मण्डलों (divisions) में स्थापित हैं। इनका मुख्य उद्देश्य राज्य स्तरीय मनोवैज्ञानिक सेवाओं को मण्डल स्तर तक पहुँचाना (decentralization of psychological services) है ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में भी बालकों को परामर्श सुविधा मिल सके। ये केन्द्र मण्डल स्तर पर मनोवैज्ञानिक परीक्षण (IQ Testing, Personality Assessment, Aptitude Testing) संचालित करते हैं और शैक्षिक पिछड़ेपन (Educational Backwardness), अधिगम कठिनाइयों (Learning Difficulties), भावनात्मक समस्याओं (Emotional Problems) और व्यवहारिक विकारों (Behavioural Disorders) वाले बालकों की पहचान एवं उपचारात्मक सहायता (Remedial Support) प्रदान करते हैं। ये केन्द्र शिक्षकों एवं अभिभावकों को भी परामर्श देते हैं कि वे समस्याग्रस्त बालकों के साथ कैसे व्यवहार करें। मण्डल स्तर पर कार्यशालाओं (Workshops) एवं प्रशिक्षण शिविरों (Training Camps) का आयोजन करना भी इनका प्रमुख कार्य है। ये केन्द्र मनोविज्ञानशाला प्रयागराज के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में कार्य करते हैं और अपनी रिपोर्ट्स एवं आँकड़े मनोविज्ञानशाला को भेजते हैं। UPTET में इनसे प्रश्न अक्सर "मण्डल स्तर पर परामर्श सेवा कौन प्रदान करता है?" या "मनोविज्ञानशाला की मण्डलीय इकाई क्या कहलाती है?" के रूप में पूछा जाता है।
3️⃣ जिला चिकित्सालय (District Hospital)
जिला चिकित्सालय परामर्श प्रक्रिया में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सहयोगी संस्था है, विशेषकर तब जब बालक की समस्या केवल मनोवैज्ञानिक नहीं बल्कि चिकित्सकीय/शारीरिक (Medical/Physical) भी हो। जिला चिकित्सालय में मनोचिकित्सक (Psychiatrist), नैदानिक मनोवैज्ञानिक (Clinical Psychologist), बाल रोग विशेषज्ञ (Paediatrician) और विशेष शिक्षा विशेषज्ञ (Special Education Specialist) उपलब्ध होते हैं जो बालकों की गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं (Mental Health Issues), विकासात्मक विलंब (Developmental Delay), ऑटिज़्म (Autism Spectrum Disorder), ADHD (Attention Deficit Hyperactivity Disorder), मानसिक मंदता (Intellectual Disability), वाक् दोष (Speech Disorders), श्रवण एवं दृष्टि दोष (Hearing & Visual Impairment) आदि की पहचान (Identification), निदान (Diagnosis) और उपचार (Treatment) करते हैं। जब विद्यालय या DIET स्तर पर बालक की समस्या का समाधान संभव नहीं होता, तब उसे रेफरल (Referral) के माध्यम से जिला चिकित्सालय भेजा जाता है। जिला चिकित्सालय विकलांगता प्रमाण पत्र (Disability Certificate) भी जारी करता है जो समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) और विशेष सुविधाओं (concessions, aids, appliances) प्राप्त करने के लिए आवश्यक होता है। RPwD Act, 2016 के अंतर्गत जिला चिकित्सालय में जिला स्तरीय विकलांगता बोर्ड (District Level Disability Board) गठित होता है जो विकलांगता की प्रकृति और प्रतिशत निर्धारित करता है। UPTET में इससे प्रश्न प्रायः "विकलांगता प्रमाण पत्र कौन जारी करता है?" या "गंभीर मानसिक समस्या वाले बालक को कहाँ रेफर करें?" जैसे स्वरूप में आता है।
4️⃣ डायट मेण्टर — DIET (District Institute of Education and Training)
DIET (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) भारत सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 की सिफारिश पर स्थापित जिला स्तरीय संस्थान है जो प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शिक्षकों के व्यावसायिक विकास (Professional Development) के लिए कार्य करता है। परामर्श के संदर्भ में DIET की भूमिका बहुत व्यापक और बहुआयामी है। DIET मेण्टर (प्रशिक्षित परामर्शदाता/Trained Mentor) शिक्षकों को कक्षा-कक्ष में बालकों की मनोवैज्ञानिक समस्याओं की पहचान करने का प्रशिक्षण देते हैं। ये मेण्टर शिक्षकों को परामर्श कौशल (Counselling Skills) सिखाते हैं — जैसे सक्रिय श्रवण (Active Listening), सहानुभूति (Empathy), गोपनीयता (Confidentiality), गैर-निर्णयात्मक दृष्टिकोण (Non-Judgmental Attitude) आदि। DIET विद्यालय-आधारित परामर्श कार्यक्रमों (School-Based Counselling Programmes) की योजना बनाता है और उनका निगरानी (monitoring) भी करता है। DIET के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यशालाएँ, सेमिनार, क्षमता निर्माण कार्यक्रम (Capacity Building Programmes) आयोजित होते हैं जहाँ शिक्षकों को विशिष्ट बालकों, समावेशी शिक्षा, मार्गदर्शन एवं परामर्श, बालक-केन्द्रित शिक्षा (Child-Centred Education) आदि विषयों पर प्रशिक्षित किया जाता है। DIET मेण्टर विद्यालयों का नियमित भ्रमण (Field Visit) भी करते हैं और शिक्षकों को साइट पर मार्गदर्शन देते हैं। UPTET में DIET से संबंधित प्रश्न बहुत बार पूछे जाते हैं — "DIET का पूर्ण रूप क्या है?", "DIET किस स्तर पर कार्य करता है?", "शिक्षकों को परामर्श प्रशिक्षण कौन देता है?" आदि।
5️⃣ पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण तन्त्र (Supervision and Inspection System)
पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण तन्त्र शिक्षा प्रशासन का वह ढाँचा है जो विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया की गुणवत्ता, शिक्षकों के कार्य-निष्पादन और बालकों के सर्वांगीण विकास की निगरानी करता है। इस तन्त्र में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO — Block Education Officer), खण्ड शिक्षा अधिकारी (ABEO), बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA — Basic Shiksha Adhikari), उप शिक्षा निदेशक (Deputy Director of Education), सहायक निरीक्षक (Assistant Inspector) और अकादमिक संसाधन व्यक्ति (ARP — Academic Resource Person) शामिल होते हैं। परामर्श के संदर्भ में इस तन्त्र की भूमिका यह है कि ये अधिकारी विद्यालयों में परामर्श सेवाओं की उपलब्धता और प्रभावशीलता की जाँच करते हैं, शिक्षकों को परामर्श संबंधी दिशा-निर्देश देते हैं, समस्याग्रस्त बालकों की पहचान में सहायता करते हैं, और यह सुनिश्चित करते हैं कि RTE Act, 2009 एवं समावेशी शिक्षा के प्रावधानों का विद्यालयों में सही ढंग से पालन हो रहा है। इस तन्त्र के माध्यम से शैक्षिक गुणवत्ता सुधार (Quality Improvement), शिक्षक-बालक अनुपात की निगरानी, विशिष्ट आवश्यकता वाले बालकों की सुविधाओं की जाँच आदि कार्य होते हैं। UPTET में इससे प्रश्न "विद्यालय स्तर पर निरीक्षण कौन करता है?" या "शैक्षिक पर्यवेक्षण का उद्देश्य क्या है?" जैसे स्वरूप में आ सकता है।
6️⃣ समुदाय एवं विद्यालय की सहयोगी समितियाँ (Community and School Support Committees)
समुदाय एवं विद्यालय की सहयोगी समितियाँ परामर्श प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं क्योंकि बालक का विकास केवल विद्यालय में नहीं बल्कि परिवार और समुदाय के सहयोग से होता है। इनमें सबसे प्रमुख है विद्यालय प्रबंध समिति (SMC — School Management Committee) जो RTE Act, 2009 की धारा 21 के अंतर्गत प्रत्येक सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालय में अनिवार्य रूप से गठित होती है। SMC में अभिभावक (Parents), शिक्षक (Teachers), स्थानीय प्राधिकारी (Local Authority) के प्रतिनिधि और समुदाय के सदस्य शामिल होते हैं। इसके अलावा अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA — Parent Teacher Association), माता समिति (Mother's Committee), ग्राम शिक्षा समिति (Village Education Committee — VEC), वार्ड शिक्षा समिति आदि भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। ये समितियाँ बालकों की शैक्षिक प्रगति पर नज़र रखती हैं, ड्रॉप-आउट बालकों की पहचान करती हैं, विशिष्ट आवश्यकता वाले बालकों के नामांकन सुनिश्चित करती हैं, अभिभावकों को बालकों की समस्याओं के प्रति जागरूक करती हैं और आवश्यकता होने पर बालकों को उचित परामर्श सेवा तक पहुँचाने में सहायता करती हैं। समुदाय-आधारित दृष्टिकोण (Community-Based Approach) परामर्श को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाता है। UPTET में SMC, PTA और RTE Act से संबंधित प्रश्न अत्यधिक बार पूछे जाते हैं।
7️⃣ सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठन (Government and Non-Government Organisations — GO & NGO)
सरकारी संगठनों (Government Organisations) में NCERT (National Council of Educational Research and Training), SCERT (State Council of Educational Research and Training), NIMHANS (National Institute of Mental Health and Neuro-Sciences, Bengaluru), NIEPID (National Institute for Empowerment of Persons with Intellectual Disabilities), RCI (Rehabilitation Council of India), NHRC (National Human Rights Commission), NCPCR (National Commission for Protection of Child Rights), SSA/Samagra Shiksha Abhiyan, ICDS (Integrated Child Development Services) आदि शामिल हैं जो राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर परामर्श, मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, अनुसंधान और नीति-निर्माण (Policy Making) में सहयोग करते हैं। गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) में अनेक स्वयंसेवी संस्थाएँ जैसे प्रथम (Pratham), सर्व शिक्षा अभियान से जुड़े NGOs, विकलांगता अधिकार समूह (Disability Rights Groups), बाल अधिकार संगठन (Child Rights Organizations), मानसिक स्वास्थ्य संस्थाएँ (Mental Health Organizations) आदि शामिल हैं जो जमीनी स्तर (Grassroot Level) पर बालकों तक परामर्श सेवाएँ पहुँचाने, जागरूकता अभियान चलाने, शिक्षकों एवं अभिभावकों को प्रशिक्षित करने और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सहायता करने का कार्य करते हैं। ये संगठन विशेष रूप से वंचित वर्ग (Disadvantaged Groups), अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST), दिव्यांग बालक (Children with Disabilities), बाल श्रमिक (Child Labourers), किशोर बालिकाएँ (Adolescent Girls) आदि के लिए परामर्श एवं पुनर्वास (Rehabilitation) कार्यक्रम चलाते हैं। UPTET में इससे प्रश्न "NCPCR का कार्य क्या है?" या "NGOs की शिक्षा में भूमिका" जैसे रूप में आ सकता है।
🔷 परामर्श सहयोग का समग्र ढाँचा (Holistic Framework of Counselling Support)
परामर्श में सहयोग देने वाली सभी संस्थाओं को एक पदानुक्रमिक संरचना (Hierarchical Structure) में समझा जा सकता है। राज्य स्तर पर मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज शीर्ष संस्था है जो नीति-निर्माण, परीक्षण-निर्माण और समन्वय का कार्य करती है। मण्डल स्तर पर मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र मध्यवर्ती कड़ी (intermediate link) के रूप में कार्य करता है। जिला स्तर पर DIET और जिला चिकित्सालय शैक्षिक-प्रशिक्षण और चिकित्सकीय सहायता प्रदान करते हैं। ब्लॉक/क्लस्टर स्तर पर पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण तन्त्र (BEO, ARP आदि) कार्य करता है। विद्यालय एवं समुदाय स्तर पर SMC, PTA, माता समिति आदि बालकों के सबसे निकट रहकर सहयोग करती हैं। और इस पूरे ढाँचे में सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठन हर स्तर पर सहायता, संसाधन और विशेषज्ञता प्रदान करते हैं। यह बहु-स्तरीय सहयोग मॉडल (Multi-Tier Support Model) बालक-केन्द्रित शिक्षा (Child-Centred Education) और समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का आधार है।
🔷 कक्षा-कक्ष अनुप्रयोग (Classroom Application) — शिक्षक की दृष्टि से
एक प्राथमिक स्तर के शिक्षक के लिए इन संस्थाओं का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है क्योंकि शिक्षक ही वह प्रथम व्यक्ति है जो बालक की समस्या को सबसे पहले पहचान सकता है। यदि किसी बालक में अधिगम कठिनाई (जैसे Dyslexia, Dyscalculia, Dysgraphia) के लक्षण दिखें तो शिक्षक को DIET मेण्टर से संपर्क करना चाहिए। यदि बालक में गंभीर भावनात्मक या व्यवहारिक समस्या हो तो मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र या जिला चिकित्सालय में रेफर करना चाहिए। यदि शारीरिक विकलांगता या विकासात्मक विलंब हो तो जिला चिकित्सालय से विकलांगता प्रमाण पत्र एवं सहायक उपकरण (Assistive Devices) दिलवाने में सहयोग करना चाहिए। अभिभावकों से नियमित संवाद (PTA बैठकों के माध्यम से) करके बालक की घर की स्थिति समझनी चाहिए और SMC को भी सक्रिय रखना चाहिए। शिक्षक को स्वयं भी DIET द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर अपने परामर्श कौशल (Counselling Skills) को विकसित करते रहना चाहिए।
📚 MUST-READ FROM STANDARD SOURCES
विद्यार्थियों को इस विषय की गहन समझ के लिए निम्नलिखित मानक स्रोतों से अध्ययन करना चाहिए। NCERT की "शिक्षा मनोविज्ञान" पुस्तक में मार्गदर्शन एवं परामर्श का अध्याय विस्तार से पढ़ना चाहिए जहाँ परामर्श की अवधारणा, प्रकार, प्रक्रिया और सहयोगी संस्थाओं पर चर्चा की गई है। SCERT, UP की बालविकास एवं शिक्षाशास्त्र संबंधी पाठ्यपुस्तकें विशेष रूप से UP की संस्थाओं (मनोविज्ञानशाला, DIET आदि) के बारे में प्रामाणिक जानकारी देती हैं। अरविंद शर्मा एवं एस. के. मंगल की शिक्षा मनोविज्ञान पुस्तकें UPTET की तैयारी के लिए सर्वाधिक उपयोगी मानी जाती हैं और इनमें मार्गदर्शन, परामर्श और सहयोगी संस्थाओं का विस्तृत विवरण मिलता है। RTE Act, 2009 की धारा 21 (SMC से संबंधित) और RPwD Act, 2016 (विकलांगता संबंधित) अवश्य पढ़ें। NPE 1986 में DIET की स्थापना संबंधी सिफारिश पढ़ें। NCTE और NCPCR के दिशा-निर्देश भी सहायक हैं।
📊 PREVIOUS YEAR PAPER ANALYSIS
बार-बार पूछे जाने वाले उप-विषय:
UPTET और अन्य TET परीक्षाओं (CTET, MPTET, REET आदि) के पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण करने पर पाया गया कि मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज से संबंधित प्रश्न सबसे अधिक बार पूछे गए हैं — विशेषकर इसका स्थान, कार्य और उद्देश्य। DIET से संबंधित प्रश्न भी अत्यधिक बार आए हैं — इसका पूर्ण रूप, स्थापना का आधार, कार्य और शिक्षक प्रशिक्षण में भूमिका। SMC (विद्यालय प्रबंध समिति) और RTE Act से जुड़े प्रश्न लगभग हर साल पूछे जाते हैं। जिला चिकित्सालय से विकलांगता प्रमाण पत्र और रेफरल से संबंधित प्रश्न भी कई बार आए हैं।
MCQs में ट्विस्ट कैसे आता है:
परीक्षक प्रायः संस्थाओं के कार्यों को आपस में बदलकर (interchange) पूछता है — जैसे मनोविज्ञानशाला का कार्य DIET को या DIET का कार्य SMC को देकर विकल्प में रख देता है। कभी-कभी संस्था का स्तर (राज्य/मण्डल/जिला/ब्लॉक) बदलकर पूछा जाता है। पूर्ण रूप (Full Forms) में एक-दो शब्द बदलकर गलत विकल्प बनाए जाते हैं — जैसे DIET को "District Institute of Elementary Training" लिखकर ट्रैप बनाया जाता है जबकि सही है "District Institute of Education and Training"। कभी-कभी "सर्वप्रथम कौन पहचान करता है?" या "अंतिम रेफरल कहाँ होता है?" जैसे क्रम-आधारित प्रश्न भी आते हैं।
परीक्षक क्या परखना चाहता है:
परीक्षक यह जानना चाहता है कि अभ्यर्थी को — (1) UP की मनोवैज्ञानिक सेवा संरचना (Psychological Service Structure) की जानकारी है या नहीं, (2) बालकों की समस्याओं के लिए उचित संस्था/विभाग की पहचान कर सकता है या नहीं, (3) शिक्षक की भूमिका एवं रेफरल प्रक्रिया (Referral Process) समझता है या नहीं, और (4) सहयोगी संस्थाओं के कार्यों में अंतर कर सकता है या नहीं।
🔁 MOST REPEATED CONCEPTS
| क्र.सं. | बार-बार पूछा गया कॉन्सेप्ट | परीक्षा में आवृत्ति |
|---|---|---|
| 1 | मनोविज्ञानशाला का स्थान — प्रयागराज (इलाहाबाद) | ★★★★★ |
| 2 | मनोविज्ञानशाला का प्रमुख कार्य — मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का निर्माण | ★★★★★ |
| 3 | DIET का पूर्ण रूप एवं स्तर (जिला स्तर) | ★★★★★ |
| 4 | DIET की स्थापना — NPE 1986 की सिफारिश | ★★★★ |
| 5 | SMC — RTE Act, 2009 की धारा 21 | ★★★★★ |
| 6 | जिला चिकित्सालय — विकलांगता प्रमाण पत्र | ★★★★ |
| 7 | मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र — मण्डल स्तर पर कार्य | ★★★ |
| 8 | पर्यवेक्षण तन्त्र — BEO, BSA का कार्य | ★★★ |
| 9 | NGOs की शिक्षा/परामर्श में भूमिका | ★★★ |
| 10 | परामर्श में शिक्षक — प्रथम पहचानकर्ता (First Identifier) | ★★★★ |
🔮 MOST PROBABLE CONCEPTS FOR UPTET 2026
| क्र.सं. | संभावित प्रश्न-क्षेत्र | संभावना स्तर |
|---|---|---|
| 1 | मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज — स्थान व कार्य | अति उच्च |
| 2 | DIET मेण्टर — शिक्षक प्रशिक्षण एवं परामर्श कौशल | अति उच्च |
| 3 | जिला चिकित्सालय — रेफरल एवं विकलांगता निदान | उच्च |
| 4 | SMC/PTA — समुदाय आधारित सहयोग | अति उच्च |
| 5 | सरकारी संगठन — NCPCR, NCERT, SCERT का कार्य | उच्च |
| 6 | NGOs — जमीनी स्तर पर परामर्श सहयोग | मध्यम-उच्च |
| 7 | पर्यवेक्षण तन्त्र — गुणवत्ता निगरानी एवं समावेशी शिक्षा अनुपालन | मध्यम |
| 8 | मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र — मनोवैज्ञानिक परीक्षण | मध्यम-उच्च |
| 9 | बहु-स्तरीय सहयोग मॉडल (Multi-Tier Support) | मध्यम |
| 10 | NEP 2020 में परामर्श/मार्गदर्शन संबंधी प्रावधान | मध्यम-उच्च |
🔑 IMPORTANT TERMS / KEYWORDS
| हिंदी शब्द | English Term | महत्व |
|---|---|---|
| परामर्श | Counselling | ★★★★★ |
| मार्गदर्शन | Guidance | ★★★★★ |
| मनोविज्ञानशाला | Psychological Bureau/Laboratory | ★★★★★ |
| मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र | Divisional Psychology Centre | ★★★★ |
| DIET (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) | District Institute of Education and Training | ★★★★★ |
| विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) | School Management Committee | ★★★★★ |
| अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) | Parent Teacher Association | ★★★★ |
| रेफरल | Referral | ★★★★ |
| विकलांगता प्रमाण पत्र | Disability Certificate | ★★★★ |
| पर्यवेक्षण | Supervision | ★★★ |
| निरीक्षण | Inspection | ★★★ |
| समावेशी शिक्षा | Inclusive Education | ★★★★★ |
| RTE Act, 2009 | Right to Education Act | ★★★★★ |
| RPwD Act, 2016 | Rights of Persons with Disabilities Act | ★★★★ |
| NCPCR | National Commission for Protection of Child Rights | ★★★★ |
| SCERT | State Council of Educational Research and Training | ★★★★ |
| NPE 1986 | National Policy on Education, 1986 | ★★★★ |
| मनोवैज्ञानिक परीक्षण | Psychological Test | ★★★★★ |
| उपचारात्मक शिक्षण | Remedial Teaching | ★★★★ |
| बालक-केन्द्रित शिक्षा | Child-Centred Education | ★★★★★ |
📝 MCQ PRACTICE FOR TOPPER LEVEL
Q1. उत्तर प्रदेश में मनोवैज्ञानिक परीक्षणों के निर्माण एवं मानकीकरण का कार्य कौन-सी संस्था करती है?
(A) DIET, प्रयागराज
(B) SCERT, लखनऊ
(C) मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज
(D) NCERT, नई दिल्ली
✅ सही उत्तर: (C) मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज
व्याख्या: मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज UP की शीर्ष मनोवैज्ञानिक संस्था है जो मनोवैज्ञानिक परीक्षणों (बुद्धि परीक्षण, व्यक्तित्व परीक्षण, अभिरुचि परीक्षण आदि) का निर्माण, मानकीकरण और प्रकाशन करती है। SCERT और NCERT शैक्षिक अनुसंधान एवं पाठ्यक्रम से संबंधित हैं, जबकि DIET शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान है।
🏷️ प्रकार: Most Repeated Concept ★★★★★
Q2. DIET (District Institute of Education and Training) की स्थापना किस शिक्षा नीति की सिफारिश पर की गई?
(A) कोठारी आयोग, 1964-66
(B) राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986
(C) राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020
(D) हण्टर आयोग, 1882
✅ सही उत्तर: (B) राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986
व्याख्या: NPE 1986 ने प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रत्येक जिले में DIET की स्थापना की सिफारिश की। कोठारी आयोग ने शिक्षा संरचना (10+2+3) की सिफारिश की थी। NEP 2020 बाद की नीति है और DIET पहले से ही स्थापित थे।
🏷️ प्रकार: Repeated + Probable Concept ★★★★★
Q3. विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) का गठन किस अधिनियम के अंतर्गत अनिवार्य है?
(A) RPwD Act, 2016
(B) RTE Act, 2009
(C) POCSO Act, 2012
(D) शिक्षा का अधिकार संशोधन अधिनियम, 2019
✅ सही उत्तर: (B) RTE Act, 2009
व्याख्या: RTE Act, 2009 की धारा 21 के अंतर्गत प्रत्येक सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालय में SMC का गठन अनिवार्य है जिसमें 75% सदस्य अभिभावक होने चाहिए और 50% महिलाएँ होनी चाहिए।
🏷️ प्रकार: Most Repeated Concept ★★★★★
Q4. मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र किस स्तर पर कार्य करता है?
(A) राज्य स्तर
(B) जिला स्तर
(C) मण्डल स्तर
(D) ब्लॉक स्तर
✅ सही उत्तर: (C) मण्डल स्तर
व्याख्या: मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज की शाखा इकाई है जो मण्डल (Division) स्तर पर मनोवैज्ञानिक सेवाएँ प्रदान करती है। राज्य स्तर पर मनोविज्ञानशाला, जिला स्तर पर DIET और ब्लॉक स्तर पर BEO कार्य करता है।
🏷️ प्रकार: Trap-Based Concept — स्तर बदलकर पूछने का ट्रैप ★★★★
Q5. एक प्राथमिक विद्यालय का शिक्षक एक बालक में गंभीर अधिगम अक्षमता (Learning Disability) के लक्षण देखता है। उसे सबसे पहले किससे संपर्क करना चाहिए?
(A) जिला चिकित्सालय
(B) मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज
(C) DIET मेण्टर/संसाधन कक्ष
(D) NGO
✅ सही उत्तर: (C) DIET मेण्टर/संसाधन कक्ष
व्याख्या: प्रारंभिक पहचान (Initial Identification) के बाद शिक्षक को सबसे पहले DIET मेण्टर/जिला स्तरीय संसाधन व्यक्ति से संपर्क करना चाहिए जो प्रारंभिक मूल्यांकन (Screening) करेगा। यदि गंभीर स्थिति हो तो उसके बाद जिला चिकित्सालय में रेफर किया जाएगा। सीधे मनोविज्ञानशाला या NGO से संपर्क करना उचित क्रम नहीं है।
🏷️ प्रकार: Application-Based + Probable Concept ★★★★★
Q6. विकलांगता प्रमाण पत्र (Disability Certificate) कौन-सी संस्था जारी करती है?
(A) DIET
(B) मनोविज्ञानशाला
(C) जिला चिकित्सालय
(D) विद्यालय प्रबंध समिति
✅ सही उत्तर: (C) जिला चिकित्सालय
व्याख्या: RPwD Act, 2016 के अंतर्गत जिला चिकित्सालय में गठित जिला स्तरीय विकलांगता बोर्ड विकलांगता की प्रकृति और प्रतिशत निर्धारित कर विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करता है। DIET शैक्षिक प्रशिक्षण संस्थान है, मनोविज्ञानशाला मनोवैज्ञानिक परीक्षण करती है लेकिन विकलांगता प्रमाण पत्र नहीं देती।
🏷️ प्रकार: Repeated + Trap-Based Concept ★★★★
Q7. RTE Act, 2009 की किस धारा में विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) का प्रावधान है?
(A) धारा 12
(B) धारा 21
(C) धारा 29
(D) धारा 35
✅ सही उत्तर: (B) धारा 21
व्याख्या: RTE Act, 2009 की धारा 21 SMC के गठन, संरचना और कार्यों का प्रावधान करती है। धारा 12 निजी विद्यालयों में 25% आरक्षण से संबंधित है, धारा 29 पाठ्यचर्या से और धारा 35 निर्देश जारी करने से संबंधित है।
🏷️ प्रकार: Most Repeated + Trap-Based Concept ★★★★★
Q8. परामर्श प्रक्रिया में 'शिक्षक' की भूमिका सबसे उपयुक्त रूप में क्या है?
(A) अंतिम निर्णयकर्ता (Final Decision Maker)
(B) प्रथम पहचानकर्ता एवं रेफरल एजेण्ट (First Identifier & Referral Agent)
(C) मनोचिकित्सक (Psychiatrist)
(D) विशेषज्ञ परामर्शदाता (Expert Counsellor)
✅ सही उत्तर: (B) प्रथम पहचानकर्ता एवं रेफरल एजेण्ट
व्याख्या: प्राथमिक स्तर का शिक्षक बालक के सबसे निकट होता है, इसलिए वह बालक की समस्या को सबसे पहले पहचान सकता है। उसकी भूमिका समस्या की प्रारंभिक पहचान करना और उचित संस्था/विशेषज्ञ को रेफर करना है, न कि स्वयं विशेषज्ञ परामर्शदाता या मनोचिकित्सक बनना।
🏷️ प्रकार: Probable + Conceptual Concept ★★★★★
Q9. निम्नलिखित में से कौन-सा गैर-सरकारी संगठन (NGO) शिक्षा एवं परामर्श के क्षेत्र में कार्य करता है?
(A) NCERT
(B) SCERT
(C) प्रथम (Pratham)
(D) DIET
✅ सही उत्तर: (C) प्रथम (Pratham)
व्याख्या: प्रथम (Pratham) भारत का सबसे प्रसिद्ध शिक्षा-केन्द्रित NGO है जो ASER (Annual Status of Education Report) प्रकाशित करता है और जमीनी स्तर पर शिक्षा सुधार एवं बालकों के लिए सहायता कार्यक्रम चलाता है। NCERT, SCERT और DIET सरकारी संस्थान हैं।
🏷️ प्रकार: Trap-Based Concept — सरकारी vs गैर-सरकारी भ्रम ★★★★
Q10. पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण तन्त्र में ब्लॉक स्तर पर कौन-सा अधिकारी कार्य करता है?
(A) BSA (Basic Shiksha Adhikari)
(B) BEO (Block Education Officer)
(C) DIET प्राचार्य
(D) जिला मजिस्ट्रेट
✅ सही उत्तर: (B) BEO (Block Education Officer)
व्याख्या: ब्लॉक स्तर पर खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) विद्यालयों का निरीक्षण, पर्यवेक्षण और प्रशासनिक नियंत्रण करता है। BSA जिला स्तर पर, DIET प्राचार्य शिक्षक प्रशिक्षण के क्षेत्र में, और जिला मजिस्ट्रेट सामान्य प्रशासन में कार्य करता है।
🏷️ प्रकार: Probable + Factual Concept ★★★★
Q11. NCPCR (National Commission for Protection of Child Rights) का मुख्य कार्य क्या है?
(A) पाठ्यक्रम निर्माण
(B) शिक्षक प्रशिक्षण
(C) बाल अधिकारों की रक्षा एवं निगरानी
(D) मनोवैज्ञानिक परीक्षण निर्माण
✅ सही उत्तर: (C) बाल अधिकारों की रक्षा एवं निगरानी
व्याख्या: NCPCR की स्थापना 2007 में Commission for Protection of Child Rights Act, 2005 के अंतर्गत हुई। यह बाल अधिकारों (Child Rights) की रक्षा, RTE Act के क्रियान्वयन की निगरानी और बालकों से संबंधित शिकायतों के निवारण का कार्य करती है। पाठ्यक्रम निर्माण NCERT का, शिक्षक प्रशिक्षण DIET/SCERT का, और मनोवैज्ञानिक परीक्षण निर्माण मनोविज्ञानशाला का कार्य है।
🏷️ प्रकार: Probable Concept ★★★★
Q12. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
(A) मनोविज्ञानशाला प्रयागराज में स्थित है
(B) DIET जिला स्तर पर कार्य करता है
(C) SMC का गठन RTE Act, 2009 के अंतर्गत होता है
(D) मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र राज्य स्तर पर कार्य करता है
✅ सही उत्तर: (D) मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र राज्य स्तर पर कार्य करता है
व्याख्या: यह कथन गलत है क्योंकि मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र मण्डल स्तर (Divisional Level) पर कार्य करता है, राज्य स्तर पर नहीं। राज्य स्तर पर मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज कार्य करती है। शेष सभी कथन सही हैं।
🏷️ प्रकार: Trap-Based + Statement-Based Concept ★★★★★
⚠️ CONCEPT TRAPS AND EXAMINER TRICKS
🔴 भ्रमित करने वाले बिंदु (Confusing Points):
1. मनोविज्ञानशाला vs SCERT: विद्यार्थी अक्सर इन दोनों को एक समझ लेते हैं। मनोविज्ञानशाला मनोवैज्ञानिक परीक्षणों और परामर्श से संबंधित है जबकि SCERT शैक्षिक अनुसंधान, पाठ्यक्रम और शिक्षक प्रशिक्षण से संबंधित है। दोनों का कार्यक्षेत्र भिन्न है।
2. DIET vs SCERT: DIET जिला स्तर पर कार्य करता है जबकि SCERT राज्य स्तर पर। DIET शिक्षक प्रशिक्षण पर केन्द्रित है जबकि SCERT पाठ्यक्रम, अनुसंधान और नीति-निर्देशन पर।
3. मार्गदर्शन vs परामर्श: मार्गदर्शन (Guidance) एक सामान्य, समूह-आधारित, दिशा-निर्देशात्मक प्रक्रिया है जबकि परामर्श (Counselling) विशिष्ट, व्यक्तिगत, गहन और विशेषज्ञतापूर्ण प्रक्रिया है। परीक्षक इन दोनों को बदल-बदलकर पूछता है।
4. DIET का Full Form: सही — District Institute of Education and Training। गलत (ट्रैप) — "District Institute of Elementary Training", "District Institute of Educational Technology" आदि। एक-दो शब्द बदलकर ट्रैप बनाया जाता है।
5. SMC vs PTA: SMC कानूनी (Legal/Statutory) है (RTE Act, 2009 के अंतर्गत अनिवार्य) जबकि PTA स्वैच्छिक (Voluntary) संगठन है। परीक्षक इन दोनों के कानूनी दर्जे को बदलकर प्रश्न पूछता है।
6. राज्य vs मण्डल vs जिला स्तर: परीक्षक संस्थाओं का स्तर बदलकर विकल्प में देता है — जैसे "मनोविज्ञानशाला जिला स्तर पर कार्य करती है" (गलत — यह राज्य स्तर पर है) या "DIET मण्डल स्तर पर कार्य करता है" (गलत — यह जिला स्तर पर है)।
7. जिला चिकित्सालय vs मनोविज्ञानशाला: जिला चिकित्सालय चिकित्सकीय निदान और विकलांगता प्रमाण पत्र देता है जबकि मनोविज्ञानशाला मनोवैज्ञानिक परीक्षण करती है। दोनों के कार्य भिन्न हैं लेकिन परीक्षक इन्हें मिलाकर पूछता है।
8. Statement-Based Traps: "निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही/गलत है?" वाले प्रश्नों में एक कथन में मामूली बदलाव (जैसे स्तर बदलना, कार्य बदलना, स्थान बदलना) करके ट्रैप बनाया जाता है। प्रत्येक कथन को ध्यान से पढ़ें।
🧠 MNEMONICS / MEMORY TRICKS
🎯 Mnemonic 1: "म-मं-जि-डा-प-स-सं" (सात संस्थाओं का क्रम)
"म-मं-जि-डा-प-स-सं" — इसे याद रखें:
म = मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज (राज्य स्तर)
मं = मंडलीय मनोविज्ञान केन्द्र (मण्डल स्तर)
जि = जिला चिकित्सालय (जिला स्तर — चिकित्सकीय)
डा = डायट/DIET मेण्टर (जिला स्तर — शैक्षिक)
प = पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण तन्त्र (ब्लॉक/क्लस्टर)
स = समुदाय एवं विद्यालय समितियाँ (SMC/PTA)
सं = संगठन (सरकारी + गैर-सरकारी)
🎯 Mnemonic 2: स्तर याद रखने का ट्रिक — "राज्य-मण्डल-जिला-ब्लॉक-विद्यालय"
"राज को मंजूर, जिला ब्लॉक विद्यालय" — इस वाक्य से स्तरों का क्रम याद करें:
राज = राज्य → मनोविज्ञानशाला
मं = मण्डल → मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र
जि = जिला → DIET + जिला चिकित्सालय
ब्लॉ = ब्लॉक → BEO (पर्यवेक्षण तन्त्र)
वि = विद्यालय → SMC, PTA, शिक्षक
🎯 Mnemonic 3: DIET का Full Form — "District Institute of Education and Training"
याद रखें: "DI = District Institute" + "ET = Education & Training"
गलत विकल्पों में "Elementary" या "Technology" आ सकता है — इनसे सावधान रहें!
🎯 Mnemonic 4: SMC — "Section 21 of RTE Act"
"SMC-21-RTE" — इस तीन शब्दों को एक साथ याद करें। SMC = Section 21 of RTE Act, 2009.
🎯 Mnemonic 5: मनोविज्ञानशाला = "मनो + प्रयाग"
"मनोविज्ञानशाला = प्रयागराज" — ये दोनों शब्द हमेशा साथ याद रखें। कभी लखनऊ, कभी वाराणसी — ये ट्रैप विकल्प हैं।
⏱️ 1-MINUTE REVISION SHEET
| संस्था | स्तर | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज | राज्य | मनोवैज्ञानिक परीक्षण निर्माण, परामर्श, अनुसंधान |
| मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र | मण्डल | मनोवैज्ञानिक सेवाएँ, बालक पहचान, शिक्षक प्रशिक्षण |
| जिला चिकित्सालय | जिला | चिकित्सकीय निदान, विकलांगता प्रमाण पत्र, रेफरल |
| DIET मेण्टर | जिला | शिक्षक प्रशिक्षण, परामर्श कौशल, कार्यशाला |
| पर्यवेक्षण तन्त्र (BEO/BSA) | ब्लॉक/जिला | निरीक्षण, गुणवत्ता निगरानी, RTE अनुपालन |
| SMC/PTA/समुदाय समिति | विद्यालय | अभिभावक सहयोग, ड्रॉप-आउट रोकना, जागरूकता |
| सरकारी/NGO संगठन | सभी स्तर | नीति, अनुसंधान, जमीनी सहयोग, प्रशिक्षण |
🔑 Key Points:
मनोविज्ञानशाला = प्रयागराज (★ सबसे ज्यादा पूछा जाता है)
DIET = NPE 1986 + जिला स्तर
SMC = RTE Act, 2009 + धारा 21
शिक्षक = प्रथम पहचानकर्ता (First Identifier)
विकलांगता प्रमाण पत्र = जिला चिकित्सालय
🚀 SCORE BOOSTER STRATEGY
1. तथ्य-आधारित प्रश्नों के लिए: मनोविज्ञानशाला का स्थान (प्रयागराज), DIET का पूर्ण रूप, SMC की धारा (21), NPE 1986 — ये चार तथ्य रटकर याद कर लें। ये लगभग हर बार पूछे जाते हैं और इनमें कोई भ्रम नहीं होना चाहिए।
2. स्तर-आधारित प्रश्नों के लिए: "राज-मं-जि-ब्लॉ-वि" का mnemonic दैनिक एक बार दोहराएँ। हर संस्था का स्तर पक्का करें क्योंकि परीक्षक सबसे ज्यादा स्तर बदलकर ट्रैप बनाता है।
3. अनुप्रयोग-आधारित प्रश्नों के लिए: "बालक में समस्या → शिक्षक पहचाने → DIET मेण्टर से संपर्क → गंभीर हो तो जिला चिकित्सालय रेफर → अति गंभीर हो तो मनोविज्ञानशाला" — यह रेफरल चेन (Referral Chain) याद रखें।
4. कथन-आधारित प्रश्नों के लिए: हर कथन में संस्था का नाम, कार्य, स्तर और स्थान — ये चार बातें जाँचें। यदि कोई एक भी गलत हो तो कथन गलत है।
5. Elimination Technique: यदि उत्तर नहीं पता तो पहले स्पष्ट रूप से गलत विकल्पों को हटाएँ। सरकारी vs गैर-सरकारी, राज्य vs जिला — इस आधार पर 2 विकल्प तुरंत हटा सकते हैं।
6. Revision Strategy: परीक्षा से पहले 1-Minute Revision Sheet और Mnemonic Table को 3 बार पढ़ लें। MCQs का अभ्यास बार-बार करें — विशेषकर Trap-Based और Statement-Based प्रश्नों का।
📋 MASTER TABLE — परामर्श सहयोगी संस्थाओं का एकीकृत सारणी
| क्र. | संस्था/विभाग | अंग्रेजी नाम | कार्य स्तर | प्रमुख कार्य | स्थापना/आधार | परामर्श में विशिष्ट भूमिका | UPTET में महत्व |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज | State Psychological Bureau, Prayagraj | राज्य स्तर | मनोवैज्ञानिक परीक्षण निर्माण, मानकीकरण, अनुसंधान, प्रशिक्षण | UP शासन, शिक्षा विभाग | शीर्ष मनोवैज्ञानिक सेवा, परीक्षण प्रकाशन, शोध | ★★★★★ |
| 2 | मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र | Divisional Psychology Centre | मण्डल स्तर | मनोवैज्ञानिक परीक्षण, बालक पहचान, कार्यशाला | मनोविज्ञानशाला की शाखा | मण्डल में मनोवैज्ञानिक सेवा विस्तार | ★★★★ |
| 3 | जिला चिकित्सालय | District Hospital | जिला स्तर | चिकित्सकीय निदान, विकलांगता प्रमाण पत्र, मनोचिकित्सा | स्वास्थ्य विभाग, RPwD Act 2016 | चिकित्सकीय रेफरल, विकलांगता प्रमाणन | ★★★★ |
| 4 | DIET मेण्टर | Trained DIET Mentor | जिला स्तर | शिक्षक प्रशिक्षण, परामर्श कौशल, कार्यशाला, विद्यालय भ्रमण | NPE 1986 | शिक्षकों को परामर्श प्रशिक्षण, प्रारंभिक स्क्रीनिंग | ★★★★★ |
| 5 | पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण तन्त्र | Supervision & Inspection System | ब्लॉक-जिला | निरीक्षण, गुणवत्ता निगरानी, RTE अनुपालन | शिक्षा प्रशासन | परामर्श सेवाओं की उपलब्धता जाँच | ★★★ |
| 6 | समुदाय/विद्यालय समितियाँ (SMC/PTA) | Community & School Support Committees | विद्यालय/समुदाय | अभिभावक सहयोग, ड्रॉप-आउट रोकना, जागरूकता | RTE Act 2009, धारा 21 | बालक-परिवार-समुदाय को जोड़ना | ★★★★★ |
| 7 | सरकारी/गैर-सरकारी संगठन | GO & NGO | सभी स्तर | नीति, अनुसंधान, जमीनी कार्य, प्रशिक्षण, जागरूकता | विभिन्न अधिनियम | संसाधन, विशेषज्ञता, वंचित वर्ग सहयोग | ★★★★ |